हाइकु

ज़िंदगी बीती सपनों के जाल में नींद न टूटी। विस्तृत नभ सिमटा टुकड़े में मेरे आँगन। घर है सीला बाहर खिली धूप विचित्र लीला। हैं अजनबी ख़ुद से हम सभी जानें ख़ुद को। स्वच्छंद मन कहना कब माने उड़ना जाने। लो, फूँका घर ले ली … Continue reading हाइकु

दीपोत्सव हाइकु

प्रत्येक मन रहे प्रकाशमय शुभ दीवाली ।   दीप जलाएँ मन के आँगन में, तम भगाएँ ।   हो आलोकित दिल के प्रकाश से जीवन सारा ।   राह दिखाए ह्रदय प्रकाशमय न भटकाए ।   फ़ीकी लगती दुनिया की दिवाली यूँ बिन तेरे । … Continue reading दीपोत्सव हाइकु

हाइकु – धूप

लो दिन बीता जोहता रहा बाट धूप न आई । बंद कमरे रहें अंधकार में खोल दो उन्हें । धूप की कमी बंद गलियारों में रहती सदा । धूप बग़ैर ये जग थम जाए अँधेरा छाए । खोलो कमरे आने दो धूप हवा मिटे सीलन … Continue reading हाइकु – धूप

हाइकु

शिकंजा सख्त नियति के हाथों का, हिल न पाऊँ ।   भ्रम का जाल सख्त डोर से बुना, काट न पाऊँ ।   दर्द दवा का ज़ख्म से भी गहरा और रुलाए ।   दूर किनारे, मिलने की खातिर पुल बनाए ।   फँसेगा कभी … Continue reading हाइकु

किस काम की यह ईवीएम !

तरक्की के नाम पर हड़बड़ी का क्या ज़माना आ गया है साहब कि जिंदगी का सारा लुत्फ़ ही ख़त्म हो चला है । इस नए जमाने की तरक्की से पहले वो भी क्या दिन थे कि समय की कोई हड़बड़ी नहीं होती थी । हर … Continue reading किस काम की यह ईवीएम !

हाइकु

मीठा सा रस तेरी प्यारी बातों में, सुनता रहूँ । गुनता रहूँ वो अनकही बातें जो मैंने सुनीं । आँखों ने कही वाणी कह न पाई गहरी बातें । दिल की बातें जो दिल से समझी लगी सरल । जब से चखा तेरी बातों का … Continue reading हाइकु

हाइकु

जीवन सूखा दिन दिन बीतता अंधेरी शाम | दिल बेचैन कटती नहीं रैन दूर सवेरा | बेबस हम तम न होता कम सूरज गुम | मंद रौशनी बढ़ता अंधियारा निर्जन पथ | जीवन मेला अजब गजब सा ढेर तमाशे |