हाइकु

शिकंजा सख्त नियति के हाथों का, हिल न पाऊँ ।   भ्रम का जाल सख्त डोर से बुना, काट न पाऊँ ।   दर्द दवा का ज़ख्म से भी गहरा और रुलाए ।   दूर किनारे, मिलने की खातिर पुल बनाए ।   फँसेगा कभी … Continue reading हाइकु

किस काम की यह ईवीएम !

तरक्की के नाम पर हड़बड़ी का क्या ज़माना आ गया है साहब कि जिंदगी का सारा लुत्फ़ ही ख़त्म हो चला है । इस नए जमाने की तरक्की से पहले वो भी क्या दिन थे कि समय की कोई हड़बड़ी नहीं होती थी । हर … Continue reading किस काम की यह ईवीएम !

हाइकु

मीठा सा रस तेरी प्यारी बातों में, सुनता रहूँ । गुनता रहूँ वो अनकही बातें जो मैंने सुनीं । आँखों ने कही वाणी कह न पाई गहरी बातें । दिल की बातें जो दिल से समझी लगी सरल । जब से चखा तेरी बातों का … Continue reading हाइकु

हाइकु

जीवन सूखा दिन दिन बीतता अंधेरी शाम | दिल बेचैन कटती नहीं रैन दूर सवेरा | बेबस हम तम न होता कम सूरज गुम | मंद रौशनी बढ़ता अंधियारा निर्जन पथ | जीवन मेला अजब गजब सा ढेर तमाशे |

हाइकु

छुपा रावण हर-एक मन में, करें दहन । दुःख व सुख रहते आते-जाते रहें मगन । बढ़े दिव्यता हर-एक दिल में करें जतन । प्रत्येक आत्मा है अंश परमात्मा करें नमन । माँ की ममता अतुल प्रेम मय करें नमन । स्वर्ग नरक हैं इसी … Continue reading हाइकु

हाइकु

दुख की नदी दर्द की धारा लिये बहती रही । रहूँ तटस्थ दुख मिले या सुख डिग न जाऊँ । दुख भी तेरे सुख तो हैं ही तेरे, क्यों घबराऊँ । दुख व सुख नदिया के दो तट बहता जाऊँ । दुख ना बुरा, वरदान … Continue reading हाइकु

आभासी दुनिया

काफ़ी समय से हम कुछ मित्रों के बीच ‘आभासी’ बनाम ‘वास्तविक’ दुनिया की बहस छिड़ी हुई है । मेरे कुछ मित्रों को लगता है कि फ़ेसबुक एक ‘आभासी दुनिया’ है और हमारे समक्ष उपस्थित तमाम पदार्थों से सुसज्जित दुनिया, जिसमें रहते हुए हम जीवन का … Continue reading आभासी दुनिया